पश्चिम बंगाल में सुवेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री पद की ली शपथ, बीजेपी ने शुरू किया ‘नए बंगाल’ का अध्याय

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पश्चिम बंगाल में बीजेपी की ऐतिहासिक जीत के बाद सुवेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड में आयोजित समारोह में पीएम नरेंद्र मोदी, अमित शाह और कई बड़े नेता शामिल हुए।

Suvendu Adhikari Takes Oath: पश्चिम बंगाल की राजनीति में शनिवार को एक ऐतिहासिक और बेहद अहम मोड़ देखने को मिला, जब भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के वरिष्ठ नेता सुवेंदु अधिकारी ने राज्य के नए मुख्यमंत्री के रूप में पद और गोपनीयता की शपथ ली। कोलकाता के प्रतिष्ठित ब्रिगेड परेड ग्राउंड में आयोजित भव्य समारोह में राज्यपाल आर.एन. रवि ने उन्हें मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई। लंबे समय तक चले सियासी संघर्ष, तीखे चुनावी मुकाबलों और सत्ता परिवर्तन की अटकलों के बीच बीजेपी ने आखिरकार बंगाल में सरकार बना ली।

शपथ ग्रहण समारोह के दौरान पूरा ब्रिगेड परेड ग्राउंड बीजेपी समर्थकों के नारों और उत्साह से गूंज उठा। बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता और समर्थक सुबह से ही समारोह स्थल पर पहुंचने लगे थे। सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए पूरे इलाके में पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों की भारी तैनाती की गई थी।

भवानीपुर की जीत ने बदली बंगाल की राजनीति

सुवेंदु अधिकारी की ताजपोशी को इसलिए भी बेहद खास माना जा रहा है क्योंकि उन्होंने विधानसभा चुनाव में भवानीपुर सीट से पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को हराया था। यह मुकाबला पूरे देश की सबसे चर्चित चुनावी लड़ाइयों में शामिल रहा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भवानीपुर में मिली जीत ने बंगाल की राजनीति की दिशा बदल दी और बीजेपी के लिए सत्ता का रास्ता साफ किया। सुवेंदु अधिकारी लंबे समय तक तृणमूल कांग्रेस का हिस्सा रहे थे, लेकिन बाद में उन्होंने बीजेपी का दामन थामा। इसके बाद से ही वे बंगाल में बीजेपी के सबसे प्रभावशाली चेहरों में शामिल हो गए।

समारोह में जुटे देश के बड़े राजनीतिक चेहरे

शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी विशेष रूप से शामिल हुए। उन्होंने सुवेंदु अधिकारी को मुख्यमंत्री बनने पर बधाई दी और इसे लोकतंत्र की बड़ी जीत बताया। समारोह में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। इन नेताओं की मौजूदगी ने समारोह को राष्ट्रीय स्तर का राजनीतिक आयोजन बना दिया। मंच पर बीजेपी नेतृत्व ने बंगाल में मिली जीत को ऐतिहासिक बताते हुए इसे राज्य में “परिवर्तन की सरकार” की शुरुआत करार दिया।

इन नेताओं ने भी ली मंत्री पद की शपथ

मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के साथ बंगाल मंत्रिमंडल में पांच अन्य नेताओं को भी शामिल किया गया। राज्यपाल ने सभी मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई।

शपथ लेने वाले नेताओं में शामिल हैं:

  • दिलीप घोष
  • अग्निमिश्रा पॉल
  • अशोक कीर्तनिया
  • निशिथ प्रमाणिक
  • क्षुदीराम टुडू

इन सभी नेताओं को बीजेपी संगठन और चुनावी रणनीति में अहम भूमिका निभाने वाला चेहरा माना जाता है।

ममता बनर्जी को भेजा गया था निमंत्रण

राजनीतिक परंपरा और प्रोटोकॉल के तहत पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को भी शपथ ग्रहण समारोह का निमंत्रण भेजा गया था। हालांकि, समारोह में उनकी मौजूदगी को लेकर दिनभर चर्चाएं होती रहीं। टीएमसी नेताओं की ओर से इस मुद्दे पर कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आई। बीजेपी नेताओं ने दावा किया कि राज्य की जनता ने बदलाव के लिए मतदान किया है, जबकि विपक्ष अब नई रणनीति तैयार करने में जुट गया है।

अमित शाह ने किया था नाम का ऐलान

गौरतलब है कि 8 मई को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह कोलकाता पहुंचे थे। बीजेपी विधायक दल की बैठक में सुवेंदु अधिकारी को सर्वसम्मति से विधायक दल का नेता चुना गया। इसके बाद अमित शाह ने औपचारिक रूप से उनके नाम का ऐलान किया था। विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद सुवेंदु अधिकारी ने राज्यपाल आर.एन. रवि से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा पेश किया और समर्थन पत्र सौंपा।

बीजेपी की प्रचंड जीत ने बदला सियासी समीकरण

विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 207 सीटों पर जीत दर्ज कर स्पष्ट बहुमत हासिल किया। वहीं, तृणमूल कांग्रेस 80 सीटों तक सिमट गई। इसके साथ ही बंगाल में टीएमसी के 15 वर्षों के शासन का अंत हो गया। बीजेपी अब इसे राज्य में विकास, उद्योग, रोजगार और प्रशासनिक बदलाव की नई शुरुआत के तौर पर पेश कर रही है। दूसरी ओर विपक्ष का कहना है कि वह जनता के मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने का काम जारी रखेगा।

राजनीतिक जानकारों के अनुसार, बंगाल में सत्ता परिवर्तन केवल सरकार बदलने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राज्य की राजनीति, सामाजिक समीकरणों और आने वाले राष्ट्रीय राजनीतिक समीकरणों पर भी बड़ा असर डाल सकता है।

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