लंदन में भाद्रपद पूर्णिमा पर भगवान शंकर आश्रय की नई शाखा का शुभारंभ हुआ। जगद्गुरु प्रो. पुष्पेन्द्र कुमार आर्यम ने सनातन, संस्कृति और विश्व कल्याण का संदेश दिया।
Bhagwan Shankar Ashray Opens New Branch in London: आर्यम इंटरनेशनल फाउंडेशन के तत्वावधान में यूनाइटेड किंगडम की राजधानी लंदन में भगवान शंकर आश्रय की नई शाखा का शुभारंभ किया गया। भाद्रपद पूर्णिमा के पावन अवसर पर आयोजित समारोह में जगद्गुरु प्रोफेसर पुष्पेन्द्र कुमार आर्यम जी महाराज ने आश्रम की नई शाखा का उद्घाटन किया। कार्यक्रम में लंदन तथा आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में शिष्य, श्रद्धालु और भारतीय संस्कृति से जुड़े लोग उपस्थित रहे। आश्रम के उद्घाटन समारोह की शुरुआत दिव्य पुष्पार्चन से हुई। गुरुदेव के मार्गदर्शन और मंत्रोच्चार के बीच श्रद्धालुओं ने पुष्प अर्पित कर विश्व के कल्याण, शांति और समृद्धि की कामना की। अनुष्ठान के उपरांत उपस्थित श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण किया गया। इसके बाद जगद्गुरु प्रोफेसर पुष्पेन्द्र कुमार आर्यम जी महाराज का प्रवचन आयोजित हुआ, जिसमें सनातन परंपरा, भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक जीवन और विश्व कल्याण से जुड़े विषयों पर विचार रखे गए।

पितृ पक्ष से पहले हुआ शुभारंभ
भाद्रपद पूर्णिमा के अगले चरण में पितृ पक्ष की शुरुआत होती है। भारतीय परंपरा में यह अवधि पूर्वजों के स्मरण, कृतज्ञता और अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। ऐसे समय में लंदन में भगवान शंकर आश्रय की नई शाखा का शुभारंभ भारतीय मूल के लोगों के लिए आध्यात्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है।
गुरुदेव आर्यम का संदेश रहा है कि अपनी जड़ों और मूल संस्कारों से जुड़ना व्यक्ति के साथ-साथ व्यापक समाज के कल्याण का आधार बन सकता है। विदेशों में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए ऐसे केंद्र अपनी भाषा, संस्कृति, परंपराओं और आध्यात्मिक विरासत से जुड़ने का माध्यम बन सकते हैं।
मॉरीशस से लंदन तक पहुंची यात्रा
भगवान शंकर आश्रय की यह यात्रा वर्ष 2012 में मॉरीशस से शुरू हुई थी। इसके बाद वर्ष 2016 में भारत और वर्ष 2023 में स्विट्जरलैंड में इसके विस्तार के बाद अब इसकी नई शाखा लंदन में स्थापित की गई है। फाउंडेशन के अनुसार, यूरोप महाद्वीप में लंदन शाखा आश्रम की दूसरी शाखा है। लंदन और ब्रिटेन के अन्य हिस्सों में भारतीय मूल के लोगों की बड़ी आबादी निवास करती है। ऐसे में आश्रम की नई शाखा को आध्यात्मिक गतिविधियों के साथ-साथ भारतीय संस्कृति और वैदिक परंपराओं से जुड़े कार्यक्रमों के केंद्र के रूप में विकसित किए जाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। फाउंडेशन से जुड़े लोगों के अनुसार, आश्रम का उद्देश्य केवल धार्मिक गतिविधियों तक सीमित नहीं है, बल्कि उन लोगों को भी भारतीय आध्यात्मिक परंपरा से जोड़ना है जो अपनी सांस्कृतिक जड़ों को समझने और उनसे जुड़ने की इच्छा रखते हैं।

प्रवासी भारतीयों के लिए सांस्कृतिक जुड़ाव का केंद्र
विदेशों में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए अपनी जन्मभूमि और सांस्कृतिक विरासत से जुड़े रहना एक महत्वपूर्ण भावनात्मक पक्ष रहा है। रोजगार, शिक्षा और बेहतर अवसरों की तलाश में भारत से बाहर जाकर बसे लोगों के लिए मंदिर, आश्रम और सांस्कृतिक संस्थान अक्सर भारतीय परंपराओं को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का माध्यम बनते हैं। भगवान शंकर आश्रय की लंदन शाखा को इसी व्यापक संदर्भ में देखा जा रहा है। यहां धार्मिक एवं आध्यात्मिक आयोजनों के साथ भारतीय संस्कारों, वैदिक परंपराओं और सांस्कृतिक मूल्यों से जुड़े कार्यक्रमों के आयोजन की संभावनाएं हैं। आश्रम से जुड़े विचार के अनुसार, घर केवल भौगोलिक स्थान नहीं बल्कि संस्कृति, संस्कार, स्मृतियों और आध्यात्मिक परंपराओं का भी नाम है। विदेशों में रहने वाले भारतीयों के लिए ऐसे केंद्र अपनी सांस्कृतिक पहचान के साथ संवाद का अवसर उपलब्ध करा सकते हैं।
सनातन की विविधता और समावेशिता पर जोर
उद्घाटन अवसर पर अपने प्रवचन में गुरुदेव आर्यम ने सनातन धर्म की विविधता और व्यापक दृष्टि पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय आध्यात्मिक परंपरा को किसी एक वर्ग, क्षेत्र या देश की सीमा में नहीं बांधा जा सकता। इसका मूल संदेश समस्त जीवों के कल्याण की भावना से जुड़ा है। प्रवचन में “सर्वे भवन्तु सुखिनः” की भावना को विश्व कल्याण के संदर्भ में प्रस्तुत किया गया। इस वैदिक प्रार्थना का आशय सभी के सुखी, स्वस्थ और कल्याणमय जीवन की कामना से है। इसी क्रम में “वसुधैव कुटुम्बकम्” की अवधारणा का उल्लेख करते हुए व्यापक मानवीय दृष्टिकोण पर बल दिया गया। भारतीय दर्शन में यह विचार समूची मानवता को एक परिवार के रूप में देखने की भावना को अभिव्यक्त करता है।

वैदिक अग्निहोत्र और पुष्पार्चन को आत्मपरिवर्तन से जोड़ा
आर्यम इंटरनेशनल फाउंडेशन की अधिशासी प्रवक्ता माँ यामिनी श्री ने कहा कि गुरुदेव आर्यम के मार्गदर्शन में विश्व के विभिन्न हिस्सों में सनातन परंपरा और वैदिक विचारों से जुड़े केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं। उनके अनुसार, लंदन में भगवान शंकर आश्रय की स्थापना इसी व्यापक प्रयास की एक और कड़ी है। उन्होंने आर्यम अष्टसूक्त के प्रथम सूक्त “आर्यम शरणम् शुभमस्तु” का उल्लेख करते हुए ‘आर्यम’ शब्द को श्रेष्ठता और श्रेष्ठ मार्ग की ओर संकेत करने वाला बताया। उनके अनुसार, वैदिक अग्निहोत्र और पुष्पार्चन केवल पूजा-अर्चना की प्रक्रियाएं नहीं, बल्कि व्यक्ति के भीतर सकारात्मक परिवर्तन और आत्मचिंतन की दिशा में भी प्रेरित करने वाली परंपराएं हैं।
यूरोप में बढ़ेगा आध्यात्मिक संवाद
लंदन शाखा की स्थापना से फाउंडेशन की गतिविधियों को यूरोप के अन्य हिस्सों तक पहुंचाने के लिए भी एक आधार मिलने की बात कही गई है। ब्रिटेन में बसे भारतीय समुदाय के अलावा भारतीय दर्शन, योग, वैदिक परंपराओं और आध्यात्मिक विचारों में रुचि रखने वाले अन्य लोगों के लिए भी यह केंद्र संवाद का माध्यम बन सकता है।
फाउंडेशन का घोषित संकल्प सनातन परंपरा के संदेश को उन लोगों तक पहुंचाना है जो आध्यात्मिक और सांस्कृतिक ज्ञान की तलाश में हैं। लंदन में नई शाखा की स्थापना इसी दिशा में एक नया अध्याय मानी जा रही है।
आयोजन में इन लोगों की रही भागीदारी
उद्घाटन कार्यक्रम को सफल बनाने में सुमन शर्मा, माधव शर्मा, सुजाता शर्मा, सुमिता फाटक, श्रीनिवास फाटक, नवीन सिक्का, प्रियंका सिक्का, उदय राज चौधरी, भावना त्रिवेदी, ढिलान त्रिवेदी, जाईना, भारत, फ़राह, जिम, जूली, मीतेश रावल, भूमि रावल, अयान रघुवंशी, दीप्ति, चिची और विजय सहित अनेक लोगों ने सहभागिता की। लंदन में भगवान शंकर आश्रय की नई शाखा का यह शुभारंभ भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक परंपराओं और प्रवासी भारतीय समुदाय के बीच सांस्कृतिक संवाद को आगे बढ़ाने की दिशा में फाउंडेशन की गतिविधियों के विस्तार के रूप में सामने आया है।
![]()
