दिल्ली में 1 नवंबर को प्रस्तावित विपक्षी रैली को लेकर CTI समेत व्यापारिक संगठनों ने चिंता जताई है। सोनिया गांधी, राहुल गांधी, अखिलेश यादव और ममता बनर्जी से रैली दीपावली के बाद कराने का आग्रह किया गया है।
Delhi Opposition Rally: राजधानी दिल्ली में 1 नवंबर को प्रस्तावित विपक्षी रैली को लेकर व्यापारिक संगठनों की चिंता बढ़ गई है। त्योहारी सीजन के बीच आयोजित होने वाली इस रैली से दिल्ली के प्रमुख बाजारों में कारोबार प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। इसी मुद्दे को लेकर चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी को पत्र लिखकर रैली को दीपावली के बाद आयोजित करने का आग्रह किया है। इससे पहले CTI राहुल गांधी को भी पत्र लिखकर अपनी चिंताओं से अवगत करा चुका है। व्यापारियों का कहना है कि 31 अक्टूबर और 1 नवंबर को रैली के कारण राजधानी के कई इलाकों में यातायात व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। इसका सीधा असर दिल्ली के थोक और खुदरा बाजारों पर पड़ेगा। CTI के मुताबिक, दिल्ली के लगभग 20 लाख व्यापारियों के बीच इस संभावित व्यवधान को लेकर चिंता का माहौल है।
10 लाख लोगों की भीड़ से ठप हो सकता है कारोबार
CTI ने सोनिया गांधी को लिखे पत्र में आशंका जताई है कि प्रस्तावित रैली में बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने से मध्य दिल्ली में यातायात व्यवस्था चरमरा सकती है। संगठन ने 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन का उदाहरण देते हुए बताया कि उस दिन करीब 5,000 से 7,000 लोगों की मौजूदगी के बावजूद मध्य दिल्ली में लगभग आठ घंटे तक जाम की स्थिति बनी रही थी। CTI का सवाल है कि जब कुछ हजार लोगों के कार्यक्रम से ही राजधानी की यातायात व्यवस्था प्रभावित हो गई थी, तो प्रस्तावित रैली में लगभग 10 लाख लोगों के पहुंचने की स्थिति में क्या हालात होंगे? संगठन को आशंका है कि इससे कई प्रमुख सड़कों पर आवागमन बाधित हो सकता है और बाजारों तक माल पहुंचाना मुश्किल हो जाएगा।
दिल्ली के 20 प्रमुख बाजारों पर पड़ सकता है असर
व्यापारिक संगठन ने अपने पत्र में कहा है कि दिल्ली के प्रमुख बाजार केवल खरीदारी के केंद्र नहीं हैं, बल्कि राजधानी की अर्थव्यवस्था की महत्वपूर्ण धुरी हैं। इन बाजारों में प्रतिदिन लगभग 10,000 से 12,000 करोड़ रुपये का कारोबार होने का दावा किया गया है। CTI ने विशेष रूप से धनतेरस और दीपावली के मद्देनजर चिंता जाहिर की है। व्यापारियों के अनुसार, त्योहारों के दौरान दुकानों में बड़ी मात्रा में सामान पहुंचाया जाता है और ग्राहकों की आवाजाही भी सामान्य दिनों की तुलना में काफी बढ़ जाती है। ऐसे में यदि 31 अक्टूबर और 1 नवंबर को मध्य दिल्ली में यातायात प्रतिबंधों के कारण चक्का जाम जैसी स्थिति बनती है, तो व्यापारियों के लिए माल की आपूर्ति और बिक्री दोनों प्रभावित हो सकती हैं।
आसपास के शहरों से आने वाले ग्राहकों पर भी असर
CTI ने यह भी कहा है कि दिल्ली के बाजारों में रोजाना आसपास के शहरों और कस्बों से लगभग 3 से 4 लाख लोग खरीदारी के लिए पहुंचते हैं। इनमें बड़ी संख्या थोक और खुदरा कारोबार से जुड़े ग्राहकों की होती है। रैली के कारण यदि यातायात व्यवस्था प्रभावित होती है, तो दूसरे शहरों से आने वाले ग्राहक दिल्ली आने से बच सकते हैं। इससे व्यापारियों को बिक्री में नुकसान उठाना पड़ सकता है। संगठन का मानना है कि त्योहारी सीजन में ग्राहकों की आवाजाही कम होना कारोबार के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है।
सोनिया गांधी से CTI की भावुक अपील
सोनिया गांधी को भेजे गए पत्र में CTI ने उनसे हस्तक्षेप करने की अपील की है। संगठन ने लिखा है कि उन्होंने हमेशा छोटे व्यापारियों की समस्याओं और उनकी आवाज को महत्व दिया है। इसलिए व्यापारियों को उम्मीद है कि वह उनकी परेशानी को समझते हुए रैली की तारीख आगे बढ़ाने के लिए पहल करेंगी। पत्र में संगठन ने उल्लेख किया कि वह पहले राहुल गांधी से भी इस संबंध में अनुरोध कर चुका है, लेकिन वहां से सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली। अब व्यापारियों ने सोनिया गांधी से आखिरी उम्मीद जताते हुए रैली को दीपावली के बाद आयोजित करने की मांग की है।
अखिलेश यादव और ममता बनर्जी को भी लिखा गया पत्र
इस मामले में दिल्ली के अन्य व्यापारिक संगठनों ने भी विपक्षी दलों के नेताओं से संपर्क किया है। सदर बाजार ट्रेड एसोसिएशन फेडरेशन और किराना कमेटी दिल्ली ने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव तथा पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को पत्र लिखकर इस मुद्दे को कांग्रेस नेतृत्व के सामने उठाने का आग्रह किया है। व्यापारी संगठनों का कहना है कि प्रस्तावित रैली का समय कारोबार के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। धनतेरस और दीपावली के बीच दिल्ली के बाजारों में बड़ी संख्या में ग्राहक पहुंचते हैं और इस अवधि में व्यापार का आंकड़ा काफी बढ़ जाता है। संगठनों ने अपने पत्र में दावा किया है कि धनतेरस से दीपावली के बीच दिल्ली में लगभग 25,000 करोड़ रुपये का कारोबार होता है। वहीं, सितंबर और अक्टूबर के दौरान हुए विरोध प्रदर्शनों, रैलियों और यातायात प्रतिबंधों के कारण व्यापारियों को पहले ही करीब 3,000 करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है।
10 हजार करोड़ रुपये तक के अतिरिक्त नुकसान की आशंका
व्यापारी संगठनों ने चेतावनी दी है कि त्योहारी खरीदारी के सबसे महत्वपूर्ण समय में एक और बड़ी रैली आयोजित होने से कारोबार को लगभग 10,000 करोड़ रुपये तक का अतिरिक्त नुकसान हो सकता है। उनका कहना है कि इस नुकसान का प्रभाव केवल दुकानदारों और व्यापारियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे बाजारों में काम करने वाले कर्मचारियों, मजदूरों, डिलीवरी कर्मियों, परिवहन कारोबारियों और छोटे व्यवसायों से जुड़े लोगों की आजीविका भी प्रभावित हो सकती है।
रामलीला मैदान के आसपास हैं दिल्ली के बड़े बाजार
व्यापारिक संगठनों ने अपने पत्र में रामलीला मैदान के आसपास स्थित प्रमुख बाजारों का भी उल्लेख किया है। उनके अनुसार, रामलीला मैदान से लगभग पांच किलोमीटर के दायरे में सदर बाजार, खारी बावली और चांदनी चौक समेत करीब 20 बड़े थोक और खुदरा बाजार स्थित हैं। इन बाजारों में देश के विभिन्न हिस्सों से व्यापारी सामान खरीदने और बेचने आते हैं। ऐसे में रैली के दौरान यातायात प्रतिबंध या सड़कों पर भारी भीड़ होने से व्यापारिक गतिविधियों पर व्यापक असर पड़ सकता है।
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