BJP CM Face in Bengal: पश्चिम बंगाल में बीजेपी की ऐतिहासिक जीत के बाद मुख्यमंत्री पद को लेकर सस्पेंस बरकरार है। सुवेंदु अधिकारी सबसे मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं, वहीं अग्निमित्रा पॉल का नाम भी तेजी से उभर रहा है।
नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की ऐतिहासिक जीत के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि राज्य की कमान आखिर किसे सौंपी जाएगी। प्रचंड बहुमत मिलने के बावजूद पार्टी ने अभी तक मुख्यमंत्री पद के लिए किसी नाम का ऐलान नहीं किया है, जिससे सियासी गलियारों में अटकलों का दौर तेज हो गया है।
भवानीपुर सीट से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को हराने वाले सुवेंदु अधिकारी को लंबे समय से बीजेपी का प्रमुख चेहरा माना जा रहा है। संगठन में उनकी पकड़, आक्रामक चुनावी रणनीति और जमीनी स्तर पर मजबूत नेटवर्क उन्हें सीएम पद की दौड़ में सबसे आगे खड़ा करता है। यही वजह है कि शुरुआती चर्चाओं में उनका नाम सबसे मजबूत दावेदार के रूप में सामने आ रहा है।
हालांकि, इस बीच पार्टी की फायरब्रांड नेता अग्निमित्रा पॉल का नाम भी तेजी से उभरकर सामने आया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्हें दिल्ली में पार्टी हाईकमान से मुलाकात के लिए बुलाया गया है, जिसके बाद उनके मुख्यमंत्री बनने की संभावनाओं को लेकर चर्चा तेज हो गई है। अग्निमित्रा पॉल ने इस बार आसनसोल दक्षिण सीट से रिकॉर्ड वोटों के अंतर से जीत दर्ज की है, जिसने उनकी दावेदारी को और मजबूत कर दिया है।
अग्निमित्रा पॉल की बढ़ती भूमिका भी पार्टी के भीतर उनकी स्थिति को दर्शाती है। चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण मंचों का संचालन किया, जिनमें पार्टी के शीर्ष नेताओं की रैलियां भी शामिल थीं। इसे बीजेपी में उनके बढ़ते प्रभाव और नेतृत्व क्षमता के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
इसके अलावा, दिलीप घोष, शामिक भट्टाचार्य और रूपा गांगुली जैसे वरिष्ठ नेताओं के नाम भी मुख्यमंत्री पद की संभावित सूची में शामिल हैं। ये सभी नेता लंबे समय से पार्टी से जुड़े रहे हैं और बंगाल की राजनीति में अपनी अलग पहचान रखते हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बीजेपी इस बार “दिल्ली मॉडल” को बंगाल में लागू कर सकती है, जहां अपेक्षाकृत नए चेहरे को मुख्यमंत्री बनाकर संगठन और सरकार के बीच संतुलन स्थापित किया जाता है। ऐसे में अग्निमित्रा पॉल एक “सरप्राइज फेस” के रूप में सामने आ सकती हैं, खासकर तब जब पार्टी ने चुनाव के दौरान महिला सुरक्षा को प्रमुख मुद्दा बनाया था।
वहीं दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने हार के बावजूद इस्तीफा देने से इनकार कर दिया है और साफ संकेत दिए हैं कि वे सड़क पर उतरकर बीजेपी के खिलाफ संघर्ष जारी रखेंगी। ऐसे में बीजेपी के सामने न सिर्फ सरकार गठन बल्कि एक मजबूत और आक्रामक नेतृत्व चुनने की चुनौती भी होगी।
अब सबकी नजरें बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व पर टिकी हैं, जो जल्द ही विधायक दल की बैठक के बाद मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम मुहर लगा सकता है। बंगाल की राजनीति में यह फैसला आने वाले समय की दिशा तय करेगा।
![]()
