अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे की कथित गड़बड़ी की जांच पूरी कर SIT टीम लौट गई है। 6 दिनों तक चली जांच में कई बड़े नामों से पूछताछ हुई। जल्द सीएम योगी को रिपोर्ट सौंपी जा सकती है।
Ram Mandir Donation Probe: राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कथित अनियमितताओं की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) ने अपनी प्रारंभिक पड़ताल पूरी कर ली है। तीन सदस्यीय SIT टीम छह दिनों तक अयोध्या में रहकर मंदिर परिसर और संबंधित व्यवस्थाओं की गहन जांच करती रही। करीब 60 घंटे से अधिक समय तक चली इस जांच के बाद टीम अयोध्या से रवाना हो गई है। अब जल्द ही SIT अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंप सकती है।
राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी गड़बड़ियों की खबर सामने आने के बाद मामला पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया है। करोड़ों राम भक्त इस मामले में पारदर्शी जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि इस मामले में किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
जांच के दौरान SIT ने राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, ट्रस्ट सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा सहित कई अहम लोगों से पूछताछ की। इसके अलावा गोपाल राव, रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव, लवकुश मिश्रा, अनुकल्प मिश्रा और चढ़ावे की गिनती से जुड़े ट्रस्ट एवं बैंक कर्मचारियों से भी सवाल-जवाब किए गए। मंदिर प्रबंधन से सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े कर्मचारियों के रिकॉर्ड की भी विस्तार से जांच की गई।
सूत्रों के अनुसार जांच में अब तक इतना स्पष्ट हुआ है कि चढ़ावे के प्रबंधन में कुछ स्तर पर अनियमितताएं हुई हैं। जांच एजेंसी को सोने-चांदी से जुड़े चढ़ावे का पूरा रिकॉर्ड नहीं मिल सका है, जिसके चलते मंदिर प्रबंधन में बड़े बदलाव की संभावना जताई जा रही है।
SIT ने मंदिर परिसर में मौजूद दान पात्र, सीसीटीवी फुटेज और काउंटिंग सेंटर की प्रक्रिया की भी गहन जांच की। दान पेटियों से राशि निकालने, उसकी गिनती करने और बैंक में जमा होने तक की पूरी प्रक्रिया का परीक्षण किया गया। साथ ही श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए जाने वाले सोने-चांदी के आभूषण, सिक्के, मुकुट और अन्य बहुमूल्य वस्तुओं के रिकॉर्ड और प्रबंधन की भी जांच की गई।
इस जांच समिति में लखनऊ के कमिश्नर विजय विश्वास पंत, लखनऊ रेंज की आईजी किरण एस और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन कुमार शामिल हैं। अब सबकी निगाहें SIT की रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे मामले में आगे की कार्रवाई का रास्ता साफ होगा।
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