श्रावण महाशिवरात्रि के अवसर पर मसूरी के भगवान शंकर आश्रम में भव्य अनुष्ठान संपन्न हुआ। गूगल मीट के माध्यम से देश-विदेश के 400 भक्त जुड़े।
Shravan Maha Shivratri 2026: श्रावण मास की महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर मसूरी स्थित भगवान शंकर आश्रम में भव्य एवं दिव्य अनुष्ठान संपन्न हुआ। इस विशेष पूजा में देश-विदेश से लगभग 400 श्रद्धालु गूगल मीट के माध्यम से ऑनलाइन जुड़े, जबकि करीब 30 भक्त आश्रम में प्रत्यक्ष रूप से उपस्थित रहे।
परमप्रज्ञ जगद्गुरु प्रोफेसर पुष्पेंद्र कुमार आर्यम जी महाराज के सानिध्य में आयोजित इस अनुष्ठान में शिव नाम की गूंज पूरे वातावरण में व्याप्त रही। गुरुदेव ने अपने संबोधन में भगवान शिव को ‘आशुतोष’ बताते हुए कहा कि वे अत्यंत सरल और शीघ्र प्रसन्न होने वाले देव हैं, जो मात्र एक लोटा जल अर्पण से भी भक्तों पर कृपा बरसाते हैं।

उन्होंने बताया कि श्रावण मास में आने वाली शिवरात्रि का विशेष आध्यात्मिक महत्व होता है, क्योंकि यह महीना भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है। इस अवसर पर आयोजित महाशिवरात्रि सिद्धि अनुष्ठान ने श्रद्धालुओं को शिव तत्व से जोड़ने का कार्य किया। गुरुदेव ने कहा कि शिव केवल एक देवता नहीं, बल्कि समस्त ब्रह्मांड की मूल ऊर्जा के स्रोत हैं। उन्होंने अर्धनारीश्वर स्वरूप को स्त्री और पुरुष के संतुलन का प्रतीक बताते हुए जीवन में संतुलन और समर्पण के महत्व पर जोर दिया।

पूजा के दौरान शिव सहस्त्रनाम और शिव तांडव स्तोत्र के मंत्रोच्चार के बीच भगवान शिव का विशेष पुष्पार्चन किया गया। अनुष्ठान में धतूरा, बिल्वपत्र, रुद्राक्ष, गेंदा, गुलाब, कमल, भांग के पत्ते, मदार के पुष्प, चंदन, केसर और पान के पत्तों सहित विभिन्न पूजन सामग्रियों का उपयोग किया गया, जो शिव को प्रिय माने जाते हैं। सभी श्रद्धालुओं ने श्वेत वस्त्र धारण कर पूजा में भाग लिया, जो शिव के शुद्ध और वैराग्य स्वरूप का प्रतीक है।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित भक्तों को चंदन तिलक लगाकर आशीर्वाद दिया गया तथा प्रत्येक को रुद्राक्ष माला भेंट स्वरूप प्रदान की गई। गुरुदेव ने इसे भगवान शिव की कृपा और सुरक्षा का प्रतीक बताया।

ट्रस्ट की अधिशासी प्रवक्ता माँ यामिनी श्री ने बताया कि गुरुदेव आर्यम जी द्वारा सनातन परंपराओं और वैदिक अनुष्ठानों को पुनर्जीवित करने का कार्य किया जा रहा है, जिसकी गूंज देश-विदेश तक पहुंच रही है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आध्यात्मिक आयोजनों से समाज में सकारात्मक ऊर्जा और जागरूकता का संचार हो रहा है। यह आयोजन श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिकता का अद्भुत संगम बनकर सामने आया, जिसने भक्तों को शिव भक्ति में सराबोर कर दिया।
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