Voter Rights Yatra to Conclude in Patna: कांग्रेस नेता राहुल गांधी की अगुवाई में 16 दिन और 1,300 किलोमीटर लंबी वोटर अधिकार यात्रा का समापन 1 सितंबर को पटना में जनमार्च के रूप में होगा। रैली की जगह पैदल मार्च से जनता की सीधी भागीदारी सुनिश्चित करने की रणनीति अपनाई गई है। महागठबंधन मतदाता सूची में गड़बड़ी के खिलाफ यह आंदोलन चला रहा है।
पटना: कांग्रेस नेता राहुल गांधी की अगुवाई में निकाली जा रही वोटर अधिकार यात्रा अब अपने अंतिम चरण में है। यह 16 दिवसीय यात्रा 17 अगस्त को सासाराम से शुरू हुई थी और लगभग 1,300 किलोमीटर की दूरी तय करते हुए 1 सितंबर को राजधानी पटना में संपन्न होगी। प्रारंभिक योजना के अनुसार समापन एक विशाल रैली के रूप में होना था, लेकिन महागठबंधन ने अंतिम समय में रणनीति बदलते हुए इसे जनमार्च का रूप दे दिया है।
क्यों बदला गया कार्यक्रम?
कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक नेताओं को लगा कि रैली की तुलना में पैदल मार्च से जनता की सीधी भागीदारी और उत्साह अधिक दिखाई देगा। विपक्षी गठबंधन को यह भी समझ आया कि यात्रा के विभिन्न पड़ावों में पहले ही कई प्रमुख नेता शामिल हो चुके हैं। ऐसे में सभी नेताओं को फिर से एक साथ मंच पर बुलाने से उतना बड़ा प्रभाव नहीं पड़ता। इसके विपरीत, सड़क पर उतरकर आम जनता के साथ कदम से कदम मिलाने का संदेश ज्यादा प्रभावशाली माना गया।
उद्देश्य: मतदाता सूची में गड़बड़ी का विरोध
महागठबंधन का आरोप है कि चुनाव आयोग के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जा रहे हैं। विपक्ष का कहना है कि यह प्रक्रिया लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला है और लाखों लोगों को उनके मतदान के अधिकार से वंचित किया जा रहा है। यही वजह है कि कांग्रेस और सहयोगी दल इस यात्रा को जनाधिकारों की रक्षा की मुहिम के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं।
यात्रा का मार्ग और जनता की भागीदारी
यह यात्रा गया, नवादा, शेखपुरा, लखीसराय, मुंगेर, कटिहार, पूर्णिया, मधुबनी और दरभंगा जिलों से होकर गुजर चुकी है। आगे यह सीतामढ़ी, पश्चिम चंपारण, सारण और भोजपुर जिलों से होते हुए पटना पहुंचेगी। यात्रा के दौरान राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और तेजस्वी यादव की संयुक्त मौजूदगी ने कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों में जोश भर दिया। विशेष रूप से मुजफ्फरपुर में राहुल गांधी और तेजस्वी यादव की बाइक राइड तथा प्रियंका गांधी के उसमें शामिल होने का दृश्य आकर्षण का केंद्र बना, जिसने अभियान को नया ऊर्जा संचार दिया।
राजनीतिक महत्व
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, विधानसभा चुनाव से पहले यह यात्रा महागठबंधन के लिए शक्ति प्रदर्शन का बड़ा मंच साबित हो सकती है। पटना में होने वाला समापन मार्च विपक्ष के लिए जनता के बीच अपनी एकजुटता और सक्रियता दिखाने का अवसर होगा। महागठबंधन इसे मतदाता अधिकारों की रक्षा के संघर्ष के रूप में पेश कर जनता के बीच मजबूत संदेश देने की कोशिश कर रहा है।
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