FCRA नियमों में बड़ा बदलाव: विदेशी फंडिंग नियम हुए सख्त, उल्लंघन पर लगेगा भारी जुर्माना

0Shares

केंद्र सरकार ने FCRA नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब विदेशी फंडिंग के गलत इस्तेमाल, प्रशासनिक खर्च और नियम उल्लंघन पर NGOs को भारी जुर्माना देना होगा।

FCRA Rules Revised: केंद्र सरकार ने विदेशी फंडिंग को लेकर नियमों में बड़ा बदलाव किया है। Ministry of Home Affairs यानी गृह मंत्रालय (MHA) ने विदेशी चंदा प्राप्त करने और उसके इस्तेमाल से जुड़े Foreign Contribution Regulation Act (FCRA), 2010 के तहत कई अहम संशोधन किए हैं। इन बदलावों का उद्देश्य एनजीओ और अन्य संस्थाओं द्वारा विदेशी फंड के उपयोग में पारदर्शिता, जवाबदेही और सख्ती सुनिश्चित करना है।

गृह मंत्रालय द्वारा जारी गजट अधिसूचना के अनुसार, अब FCRA नियमों के उल्लंघन पर पहले की तुलना में अधिक कड़ा जुर्माना लगाया जाएगा। मंत्रालय ने यह फैसला अधिनियम की धारा 41(1) के तहत प्राप्त शक्तियों का उपयोग करते हुए लिया है।

प्रशासनिक खर्च पर सीमा से अधिक खर्च करने पर जुर्माना

नए नियमों के मुताबिक, यदि कोई संस्था विदेशी चंदे का 20 प्रतिशत से अधिक हिस्सा प्रशासनिक खर्चों पर खर्च करती है, तो इसे FCRA की धारा 8 का उल्लंघन माना जाएगा। ऐसे मामलों में संस्था को 1 लाख रुपये या निर्धारित सीमा से अधिक खर्च की गई राशि का 5 प्रतिशत, जो भी अधिक हो, जुर्माने के रूप में देना होगा।

सट्टेबाजी और जोखिम वाली गतिविधियों पर कड़ी कार्रवाई

सरकार ने विदेशी चंदे को सट्टेबाजी या किसी जोखिमपूर्ण गतिविधि में लगाने को गंभीर उल्लंघन माना है। यदि कोई संस्था ऐसा करती है, तो उसे 1 लाख रुपये या निवेश की गई राशि का 30 प्रतिशत, जो भी अधिक हो, जुर्माना भरना होगा। इसके अलावा उस गतिविधि से हुई पूरी कमाई सरकार जब्त कर सकती है।

निर्धारित उद्देश्य से अलग उपयोग पर भी दंड

यदि किसी संस्था को विदेशी फंड किसी विशेष उद्देश्य के लिए मिला है लेकिन उसका उपयोग किसी अन्य कार्य में किया जाता है, तो इसे भी गंभीर उल्लंघन माना जाएगा। ऐसे मामलों में 1 लाख रुपये या उपयोग की गई राशि का 30 प्रतिशत, जो भी अधिक हो, जुर्माना लगाया जाएगा। इसी प्रकार बिना वैध पंजीकरण विदेशी फंड स्वीकार करना, उसका उपयोग करना, या अनुमोदित उद्देश्य एवं क्षेत्र से बाहर खर्च करना भी दंडनीय होगा।

एनजीओ के लिए रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में बड़ा बदलाव

सरकार ने विदेशी फंड प्राप्त करने के नियमों में भी महत्वपूर्ण संशोधन किए हैं। अब किसी भी NGO या संस्था को FCRA के तहत आवेदन करते समय स्पष्ट रूप से बताना होगा कि:

  • संस्था का मुख्य उद्देश्य क्या है
  • वह किन क्षेत्रों में काम करेगी
  • किन राज्यों या केंद्र शासित प्रदेशों में उसकी गतिविधियां संचालित होंगी

आवेदन के दौरान संस्थाओं को सरकार द्वारा निर्धारित सूची में से ही अपने कार्यक्षेत्र और उद्देश्य चुनने होंगे।

धार्मिक गतिविधियों को अनुमति, धर्मांतरण बाहर

संशोधित नियमों के अनुसार कई धार्मिक गतिविधियों को अनुमति दी गई है। हालांकि, धर्मांतरण (Conversion) से जुड़ी गतिविधियों को पंजीकरण के योग्य श्रेणी से स्पष्ट रूप से बाहर रखा गया है। इसका अर्थ है कि धर्म-परिवर्तन से जुड़े उद्देश्यों के लिए विदेशी फंड प्राप्त करना अब और कठिन हो सकता है।

विदेशी नागरिक पदाधिकारी होने पर बढ़ी सख्ती

गृह मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि किसी संस्था के मुख्य पदाधिकारियों में भारतीय मूल के लोगों के अलावा विदेशी नागरिक शामिल हैं, तो ऐसी संस्थाओं को FCRA के तहत पंजीकरण या पूर्व स्वीकृति देने पर आमतौर पर विचार नहीं किया जाएगा। हालांकि सरकार ने विशेष परिस्थितियों के लिए अपवाद भी रखा है। केंद्र सरकार विशेष आदेश जारी कर कुछ मामलों में विदेशी नागरिकों को मुख्य पदाधिकारी के रूप में अनुमति दे सकती है।

मुख्य पदाधिकारी की परिभाषा हुई व्यापक

सरकार ने “मुख्य पदाधिकारी” की परिभाषा को भी विस्तार दिया है। अब इसमें शामिल होंगे:

  • कंपनी के डायरेक्टर
  • फर्म के पार्टनर
  • ट्रस्ट के ट्रस्टी
  • HUF का कर्ता
  • संगठन के प्रबंधन और निर्णयों पर नियंत्रण रखने वाला कोई भी व्यक्ति

क्या होगा असर?

विशेषज्ञों का मानना है कि इन बदलावों से एनजीओ सेक्टर में वित्तीय अनुशासन बढ़ेगा। संस्थाओं को अब विदेशी फंड के उपयोग में अधिक सतर्कता बरतनी होगी। सरकार का कहना है कि इन संशोधनों का उद्देश्य विदेशी फंडिंग सिस्टम को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और नियंत्रित बनाना है, ताकि धन का उपयोग तय उद्देश्यों के अनुसार ही हो सके। कुल मिलाकर, नए FCRA नियम एनजीओ और सामाजिक संस्थाओं के लिए अनुपालन (Compliance) को पहले से अधिक महत्वपूर्ण बना देंगे।

Loading

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *