SIR पर चुनाव आयोग का बड़ा फैसला, दिल्ली समेत 6 राज्यों में बढ़ी समयसीमा, जानें कब जारी होगी फाइनल वोटर लिस्ट

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चुनाव आयोग ने SIR 2026 के तहत दिल्ली समेत 6 राज्यों में मतदाता सूची पुनरीक्षण की समयसीमा बढ़ाई। जानें महाराष्ट्र, दिल्ली, हरियाणा, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और नागालैंड में फाइनल वोटर लिस्ट कब जारी होगी।

SIR Update 2026: देश में मतदाता सूची को अद्यतन और अधिक पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision—SIR) प्रक्रिया के बीच चुनाव आयोग ने अहम निर्णय लिया है। आयोग ने दिल्ली समेत छह राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में मतदाता सूची के पुनरीक्षण कार्यक्रम की समयसीमा बढ़ा दी है। इस फैसले के बाद संबंधित क्षेत्रों में दावे और आपत्तियां दर्ज कराने से लेकर अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित करने तक की समय-सारणी में बदलाव किया गया है।

चुनाव आयोग के अनुसार, महाराष्ट्र, दिल्ली, आंध्र प्रदेश, हरियाणा, तेलंगाना और नागालैंड के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों की ओर से समयसीमा में बदलाव का अनुरोध किया गया था। इन अनुरोधों पर विचार करने के बाद आयोग ने संशोधित कार्यक्रम जारी किया है। इसके तहत पांच राज्यों में अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन 30 नवंबर तक किया जाएगा, जबकि दिल्ली में अंतिम सूची जारी करने की तारीख दिसंबर में निर्धारित की गई है।

क्या है SIR और क्यों कराई जा रही है यह प्रक्रिया?

विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR मतदाता सूची की व्यापक जांच और अद्यतन करने की प्रक्रिया है। इसका उद्देश्य मतदाता सूची में पात्र नागरिकों के नाम शामिल करना और अपात्र प्रविष्टियों को निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत हटाना है। चुनाव आयोग का कहना है कि इस प्रक्रिया से मतदाता सूची को अधिक सटीक बनाने में मदद मिलती है। वहीं, SIR को लेकर विभिन्न विपक्षी दलों ने सवाल उठाए हैं। विपक्षी दलों की प्रमुख चिंताओं में पात्र मतदाताओं के नाम सूची से हटने की आशंका और पुनरीक्षण प्रक्रिया की पारदर्शिता जैसे मुद्दे शामिल हैं। ऐसे में संबंधित राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में समयसीमा बढ़ाने के फैसले को मतदाता सूची के पुनरीक्षण कार्यक्रम के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

पांच राज्यों में 30 नवंबर तक जारी होगी अंतिम मतदाता सूची

चुनाव आयोग की ओर से जारी संशोधित कार्यक्रम के अनुसार, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, हरियाणा, तेलंगाना और नागालैंड में अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन की समयसीमा 30 नवंबर तक बढ़ाई गई है। समयसीमा में इस बदलाव से संबंधित अधिकारियों को पुनरीक्षण प्रक्रिया के विभिन्न चरण पूरे करने के लिए अतिरिक्त समय मिलेगा। इसमें मतदाताओं की ओर से दर्ज दावों और आपत्तियों पर कार्रवाई तथा संबंधित मामलों का निपटारा शामिल है। मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन से पहले निर्धारित प्रक्रियाओं को पूरा करना आवश्यक होता है, ताकि सूची में नामों की प्रविष्टियों और पात्रता से जुड़े मामलों की जांच की जा सके।

महाराष्ट्र में दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की तारीख बढ़ी

महाराष्ट्र में SIR कार्यक्रम के तहत दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की समयसीमा में विशेष बदलाव किया गया है। पहले यह तारीख 26 अक्टूबर निर्धारित थी, जिसे बढ़ाकर 13 नवंबर कर दिया गया है। संशोधित कार्यक्रम के अनुसार, दावों और आपत्तियों से संबंधित नोटिस जारी करने तथा उनके निपटारे की प्रक्रिया 25 नवंबर तक चलेगी। इसके बाद अंतिम मतदाता सूची 30 नवंबर को प्रकाशित की जाएगी। राज्य में इससे पहले 31 अगस्त को मसौदा मतदाता सूची जारी की गई थी। पुराने कार्यक्रम के तहत दावों और आपत्तियों से जुड़े मामलों के निपटारे के लिए 10 नवंबर की तारीख निर्धारित की गई थी।

नई समय-सारणी के बाद मतदाताओं को अपने नाम, विवरण और पात्रता से संबंधित मामलों को सामने रखने के लिए अतिरिक्त समय मिलेगा। जिन नागरिकों को मसौदा सूची में अपने नाम या अन्य जानकारियों को लेकर कोई आपत्ति है, उन्हें निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार संबंधित निर्वाचन अधिकारियों के समक्ष अपना पक्ष रखना चाहिए।

दिल्ली में SIR की समयसीमा में बड़ा बदलाव

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में भी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम को लेकर समयसीमा बढ़ाई गई है। चुनाव आयोग के संशोधित कार्यक्रम के अनुसार, दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की अंतिम तारीख 30 अक्टूबर से बढ़ाकर 25 नवंबर कर दी गई है। इसके साथ ही, दावों और आपत्तियों के निपटारे की समयसीमा में भी बदलाव किया गया है। पहले यह प्रक्रिया 30 नवंबर तक पूरी की जानी थी, लेकिन अब इसके लिए 15 दिसंबर तक का समय निर्धारित किया गया है।

आयोग की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, दिल्ली की अंतिम मतदाता सूची 22 दिसंबर को प्रकाशित की जाएगी। दिल्ली में समयसीमा बढ़ाए जाने से उन नागरिकों को अतिरिक्त अवसर मिलेगा, जिन्हें मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज कराने, विवरण में सुधार कराने या किसी प्रविष्टि को लेकर निर्धारित प्रक्रिया के तहत आपत्ति दर्ज कराने की आवश्यकता है।

मतदाताओं के लिए क्या है जरूरी?

SIR की प्रक्रिया के दौरान मतदाताओं के लिए अपनी प्रविष्टियों की जांच करना महत्वपूर्ण है। जिन राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में पुनरीक्षण कार्यक्रम चल रहा है, वहां के नागरिकों को मसौदा मतदाता सूची में अपना नाम और अन्य विवरण ध्यानपूर्वक जांचने चाहिए। यदि किसी मतदाता का नाम सूची में नहीं मिलता या नाम, पता अथवा अन्य विवरणों में गलती दिखाई देती है, तो उसे चुनाव आयोग के निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं के अनुसार संबंधित निर्वाचन अधिकारी से संपर्क करना चाहिए। मतदाताओं को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि समयसीमा बढ़ने का अर्थ यह नहीं है कि अंतिम सूची में प्रत्येक बदलाव अपने आप स्वीकार कर लिया जाएगा। दावों और आपत्तियों पर निर्णय निर्धारित प्रक्रिया और लागू नियमों के अनुसार ही होगा।

SIR को लेकर राजनीतिक बहस जारी

देश में SIR की प्रक्रिया राजनीतिक चर्चा का विषय भी बनी हुई है। विपक्षी दलों ने अलग-अलग अवसरों पर इस प्रक्रिया के तौर-तरीकों और संभावित प्रभावों पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि पुनरीक्षण के दौरान किसी भी पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची से नहीं छूटना चाहिए। दूसरी ओर, चुनाव आयोग का तर्क है कि मतदाता सूची को अद्यतन रखना स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की महत्वपूर्ण शर्त है। आयोग के अनुसार, इसका उद्देश्य पात्र मतदाताओं को सूची में शामिल करना और अपात्र प्रविष्टियों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत दुरुस्त करना है। ऐसे में पुनरीक्षण प्रक्रिया की पारदर्शिता, मतदाताओं को पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराने और दावों-आपत्तियों का समय पर निपटारा करने की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है।

कब आएगी अंतिम मतदाता सूची? जानें प्रमुख तारीखें

चुनाव आयोग की ओर से उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार, संबंधित क्षेत्रों के लिए प्रमुख तारीखें इस प्रकार हैं:

  • महाराष्ट्र: दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की अंतिम तारीख 13 नवंबर; अंतिम मतदाता सूची 30 नवंबर।
  • आंध्र प्रदेश: अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन 30 नवंबर।
  • हरियाणा: अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन 30 नवंबर।
  • तेलंगाना: अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन 30 नवंबर।
  • नागालैंड: अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन 30 नवंबर।
  • दिल्ली: दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की अंतिम तारीख 25 नवंबर; निपटारे की समयसीमा 15 दिसंबर; अंतिम मतदाता सूची 22 दिसंबर।

इन तारीखों के आधार पर संबंधित राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के मतदाता अपने नाम तथा अन्य विवरणों की जांच और आवश्यक कार्रवाई की योजना बना सकते हैं।

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