विजयादशमी पर भगवान शंकर आश्रम, मसूरी में संपन्न हुआ ‘विजय वाहिनी चण्डी महायज्ञ’, देश-विदेश के 416 श्रद्धालुओं ने लिया भाग

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मसूरी के भगवान शंकर आश्रम में विजयादशमी पर विजय वाहिनी चण्डी महायज्ञ संपन्न हुआ। जगद्गुरु प्रो. पुष्पेंद्र कुमार आर्यम के सानिध्य में देश-विदेश के 416 श्रद्धालुओं ने ऑनलाइन और ऑफलाइन भाग लिया।

Vijay Vahini Chandi Maha Yagna: विजयादशमी के पावन अवसर पर उत्तराखंड के मसूरी स्थित भगवान शंकर आश्रम में ‘विजय वाहिनी चण्डी महायज्ञ’ का भव्य आयोजन किया गया। आर्यम इंटरनेशनल फ़ाउंडेशन के तत्त्वावधान में आयोजित इस विशेष धार्मिक अनुष्ठान में देश-विदेश के लगभग 416 श्रद्धालु ऑनलाइन एवं ऑफलाइन माध्यम से शामिल हुए। इनमें करीब 60 श्रद्धालुओं ने आश्रम में प्रत्यक्ष रूप से उपस्थित होकर पूजा-अर्चना और यज्ञ में सहभागिता की, जबकि अन्य भक्तों ने ऑनलाइन माध्यम से जुड़कर अनुष्ठान में भाग लिया।

यह धार्मिक आयोजन ट्रस्ट के अध्यक्ष एवं भगवान शंकर आश्रम के मुख्य अधिष्ठाता परमप्रज्ञ जगद्गुरु प्रोफेसर पुष्पेंद्र कुमार आर्यम जी महाराज के पावन सानिध्य में संपन्न हुआ। पूरे अनुष्ठान के दौरान श्रद्धालुओं ने धार्मिक आस्था, मंत्रोच्चार और वैदिक परंपराओं के अनुरूप पूजा-अर्चना की।

पुष्पार्चन के बाद विधि-विधान से संपन्न हुआ महायज्ञ

कार्यक्रम का शुभारंभ कमल, गेंदे और गुलाब सहित विभिन्न प्रकार के पुष्पों से विधिवत पुष्पार्चन के साथ हुआ। इसके बाद निर्धारित धार्मिक विधियों के अनुसार विजय वाहिनी चण्डी महायज्ञ संपन्न कराया गया। श्रद्धालुओं ने यज्ञ में आहुतियां अर्पित करते हुए अपने परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य, सुरक्षा और आध्यात्मिक उन्नति की कामना की।

आयोजन में शामिल भक्तों ने संकटों से मुक्ति, आर्थिक उन्नति, मानसिक एवं शारीरिक कल्याण तथा ग्रह दोषों से राहत की कामना के साथ अनुष्ठान में सहभागिता की। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, विजयादशमी पर माँ चण्डी की आराधना को विजय, शक्ति और सकारात्मक संकल्पों से जोड़कर देखा जाता है।

ऑनलाइन माध्यम से देश-विदेश के श्रद्धालु जुड़े

आर्यम इंटरनेशनल फ़ाउंडेशन की ओर से सनातन धर्म और वैदिक परंपराओं को अधिकाधिक लोगों तक पहुंचाने के उद्देश्य से ऑनलाइन धार्मिक सत्र आयोजित किए जाते हैं। इसी क्रम में Google Meet के माध्यम से श्रद्धालुओं को पूजा-पाठ और विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों से जुड़ने का अवसर दिया जाता है।

आयोजन से जुड़े विवरण के अनुसार, अमेरिका, स्विट्जरलैंड, लंदन, मॉरीशस, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और दुबई सहित विभिन्न देशों में रहने वाले श्रद्धालु भी इन कार्यक्रमों में सहभागिता करते हैं। ऑनलाइन व्यवस्था के माध्यम से विदेशों में रह रहे भक्त अपने स्थान पर रहते हुए धार्मिक गतिविधियों में शामिल हो सकते हैं और निर्धारित विधि-विधान के अनुसार पूजा-अर्चना कर सकते हैं।

फ़ाउंडेशन का उद्देश्य सनातन धर्म की परंपराओं को घर-घर तक पहुंचाना तथा लोगों को धार्मिक एवं आध्यात्मिक गतिविधियों से जोड़ना है।

यज्ञ में पारंपरिक पूजन सामग्री का हुआ प्रयोग

विजय वाहिनी चण्डी महायज्ञ में विभिन्न पारंपरिक पूजन एवं हवन सामग्रियों का उपयोग किया गया। इनमें पीली और काली सरसों, काले एवं सफेद तिल, सफेद और लाल चंदन, आम, अंजीर और अनार की समिधा, कमल गट्टा, इलायची, नागकेसर, जावित्री तथा अक्षत सहित अन्य सामग्री शामिल रही। इस अवसर पर जगद्गुरु प्रोफेसर पुष्पेंद्र कुमार आर्यम जी महाराज ने विजयादशमी पर शस्त्र पूजा के धार्मिक महत्त्व का भी उल्लेख किया। भारतीय परंपरा में शस्त्र पूजा को शक्ति, साहस, कर्तव्य और धर्म की रक्षा के संकल्प से जोड़कर देखा जाता है।

पूजा में सामग्री से अधिक शुद्धता और श्रद्धा महत्त्वपूर्ण : गुरुदेव आर्यम

पूजन सामग्री की गुणवत्ता पर जोर देते हुए गुरुदेव आर्यम जी महाराज ने कहा कि किसी भी धार्मिक अनुष्ठान में सामग्री की अधिकता की तुलना में उसकी शुद्धता अधिक महत्त्वपूर्ण है। उनके अनुसार, यदि अनेक प्रकार की सामग्रियों में मिलावट हो, तो उनकी संख्या बढ़ाने का कोई विशेष लाभ नहीं है। इसके बजाय कम सामग्री का उपयोग किया जाए, लेकिन वह शुद्ध और गुणवत्तापूर्ण हो।

उन्होंने बाजार में उपलब्ध मिठाइयों में रंगों और रासायनिक पदार्थों की संभावित मिलावट के प्रति भी श्रद्धालुओं को सावधान किया। उन्होंने भक्तों को घर पर तैयार किए गए प्रसाद अथवा गुड़ और शुद्ध मिठाई जैसी वस्तुओं को भोग के रूप में अर्पित करने की सलाह दी। उनका संदेश धार्मिक अनुष्ठानों में बाहरी आडंबर की अपेक्षा पवित्रता, निष्ठा और सही आचरण को प्राथमिकता देने पर केंद्रित रहा।

विजयादशमी पर माँ चण्डी की उपासना का विशेष महत्त्व

विजयादशमी भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा का प्रमुख पर्व है। इसे असत्य पर सत्य तथा अधर्म पर धर्म की विजय के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन भगवान श्रीराम ने रावण पर विजय प्राप्त की थी। इसके साथ ही यह पर्व देवी दुर्गा द्वारा महिषासुर के वध की स्मृति से भी जुड़ा हुआ है।

शारदीय नवरात्र के नौ दिनों तक देवी शक्ति की आराधना के बाद दशमी तिथि को विजय और शुभ संकल्पों के पर्व के रूप में मनाया जाता है। माँ चण्डी को देवी दुर्गा का शक्तिशाली स्वरूप माना जाता है। उनकी महिमा का वर्णन दुर्गा सप्तशती में मिलता है, जिसे चण्डी पाठ के नाम से भी जाना जाता है। इसी धार्मिक मान्यता के अनुरूप विजयादशमी के अवसर पर आयोजित चण्डी महायज्ञ में श्रद्धालुओं ने देवी शक्ति का आह्वान करते हुए जीवन में साहस, सकारात्मकता और धर्म के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।

भोजन प्रसादम के साथ कार्यक्रम का समापन

महायज्ञ और पूजा-अर्चना के उपरांत भगवान शंकर आश्रम में भोजन प्रसादम की व्यवस्था की गई। उपस्थित श्रद्धालुओं ने श्रद्धापूर्वक प्रसाद ग्रहण किया। धार्मिक अनुष्ठान के साथ सामूहिक भोजन के आयोजन ने भक्तों को आपसी संवाद और सहभागिता का अवसर भी प्रदान किया। कार्यक्रम में आश्रम की धार्मिक परंपराओं और सामूहिक सेवा भावना का वातावरण देखने को मिला।

वैदिक पूजा पद्धतियों के संरक्षण पर फ़ाउंडेशन का जोर

ट्रस्ट की अधिशासी प्रवक्ता माँ यामिनी श्री ने बताया कि गुरुदेव आर्यम जी महाराज के बड़ी संख्या में दीक्षित शिष्य देश-विदेश में मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि गुरुदेव सनातन धर्म और वैदिक काल से जुड़ी विशिष्ट पूजा पद्धतियों के संरक्षण तथा पुनर्स्थापना के लिए कार्य कर रहे हैं।

माँ यामिनी श्री के अनुसार, गुरुदेव का मानना है कि धार्मिक क्रियाओं को उचित विधि, अनुशासन और पूर्ण निष्ठा के साथ संपन्न करना चाहिए। उन्होंने गुरुदेव के विचारों को उद्धृत करते हुए कहा, “सही धार्मिक क्रिया, अनुशासन के साथ जब पूर्ण निष्ठा के साथ की जाती है, तब ईश्वर उसका फल हमें जरूर देते हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि गुरुदेव आर्यम की शिक्षाओं से अनेक लोग प्रेरणा प्राप्त कर रहे हैं और उनके माध्यम से धार्मिक एवं आध्यात्मिक जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का प्रयास किया जा रहा है।

आयोजन की सफलता में श्रद्धालुओं और सहयोगियों की भूमिका

विजय वाहिनी चण्डी महायज्ञ को सफल बनाने में राकेश रघुवंशी, संध्या रघुवंशी, रमन आर्यम, प्रतिभा, उत्कर्ष, हर्षिता और जया शर्मा सहित अन्य सहयोगियों का योगदान रहा। विजयादशमी के अवसर पर आयोजित इस महायज्ञ के माध्यम से भगवान शंकर आश्रम और आर्यम इंटरनेशनल फ़ाउंडेशन ने धार्मिक परंपराओं, सामूहिक सहभागिता और वैदिक पूजा पद्धतियों के प्रति श्रद्धालुओं की आस्था को सुदृढ़ करने का संदेश दिया। देश-विदेश से भक्तों की सहभागिता ने यह भी दर्शाया कि ऑनलाइन माध्यम धार्मिक आयोजनों में दूर-दराज के लोगों को जोड़ने का एक उपयोगी साधन बन रहा है।

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