ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए औपचारिक निमंत्रण भेजा है।
PM Modi May Visit Iran for Khamenei Funeral: ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ईरान आने का औपचारिक निमंत्रण भेजा है। सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी को ईरान के दिवंगत सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया है। यह निमंत्रण ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया में सुरक्षा हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं। सूत्रों के मुताबिक, ईरान के राष्ट्रपति कार्यालय की ओर से यह औपचारिक निमंत्रण मंगलवार को नई दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास के माध्यम से भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) को भेजा गया। बताया जा रहा है कि ईरानी दूतावास को इस संबंध में तेहरान से दो दिन पहले आधिकारिक सूचना प्राप्त हुई थी।
अयातुल्ला अली खामेनेई, जो ईरान के सर्वोच्च नेता और देश की राजनीतिक-सामरिक नीति के सबसे प्रभावशाली चेहरा माने जाते थे, 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हवाई हमले में मारे गए थे। यह हमला उनके परिसर को निशाना बनाकर किया गया था, जिसके बाद पूरे मध्य पूर्व में तनाव चरम पर पहुंच गया। ईरान सरकार ने खामेनेई के सम्मान में राजकीय स्तर पर अंतिम संस्कार कार्यक्रम आयोजित करने का फैसला किया है। कार्यक्रम की शुरुआत 4 जुलाई को राजधानी तेहरान से होगी। इसके बाद कई शहरों में श्रद्धांजलि सभाएं आयोजित की जाएंगी। अंतिम चरण में 9 जुलाई को खामेनेई को उनके गृहनगर मशहद में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा।
ईरान के लिए यह सिर्फ एक अंतिम संस्कार नहीं बल्कि राष्ट्रीय शोक और राजनीतिक महत्व का कार्यक्रम माना जा रहा है। खामेनेई दशकों तक ईरान की राजनीति, विदेश नीति और सामरिक निर्णयों के केंद्र में रहे। उनकी मृत्यु के बाद पूरे क्षेत्र की भू-राजनीतिक स्थिति पर गहरा असर देखने को मिल रहा है। इस बीच, ईरान में सुरक्षा हालात को देखते हुए भारत ने भी सतर्क रुख अपनाया है। तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने बुधवार को एक एडवाइजरी जारी करते हुए भारतीय नागरिकों से अपील की है कि वे अत्यंत आवश्यक होने पर ही ईरान की यात्रा करें।
दूतावास की ओर से जारी सुरक्षा सलाह में कहा गया है कि मौजूदा हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है। ईरान में पहले से मौजूद भारतीय नागरिकों और जरूरी काम से वहां जाने वालों को अतिरिक्त सावधानी बरतने, स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करने और स्थिति पर लगातार नजर बनाए रखने की सलाह दी गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस निमंत्रण को स्वीकार करेंगे या नहीं, इस पर फिलहाल भारत सरकार की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। हालांकि, कूटनीतिक दृष्टि से यह निमंत्रण भारत-ईरान संबंधों के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी की संभावित यात्रा भारत की पश्चिम एशिया नीति और क्षेत्रीय संतुलन के संदर्भ में महत्वपूर्ण संकेत दे सकती है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर नई दिल्ली की प्रतिक्रिया पर सभी की नजरें बनी रहेंगी।
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