इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि ईरान के खिलाफ अभियान अभी खत्म नहीं हुआ है। उन्होंने अमेरिका पर सैन्य निर्भरता कम कर स्वदेशी रक्षा उद्योग को मजबूत करने पर जोर दिया।
Netanyahu Pushes for Reduced Military Dependence on US: इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने स्पष्ट कर दिया है कि ईरान के खिलाफ इजरायल का सैन्य अभियान अभी समाप्त नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में बढ़ते तनाव और ईरान से जुड़े खतरों को देखते हुए इजरायल को अपनी सैन्य क्षमताओं को और मजबूत करना होगा। साथ ही उन्होंने अमेरिका पर सैन्य निर्भरता कम करने और घरेलू रक्षा उद्योग को सशक्त बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
नेतन्याहू का यह बयान ऐसे समय में सामने आया है, जब हाल ही में ईरान और अमेरिका के बीच स्विट्जरलैंड में शांति समझौते को लेकर अहम वार्ता हुई है। इस बैठक को पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इसी बीच अमेरिकी प्रशासन, विशेष रूप से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाली सरकार, इजरायल पर लेबनान में सैन्य कार्रवाई रोकने और सीजफायर प्रक्रिया में शामिल होने का दबाव बना रही है। हालांकि नेतन्याहू के हालिया बयान से संकेत मिलता है कि इजरायल फिलहाल अपनी सुरक्षा रणनीति में किसी प्रकार की नरमी के पक्ष में नहीं है।
ईरान और उसके सहयोगी समूहों पर सख्त रुख
मंगलवार को अपने संबोधन में नेतन्याहू ने कहा कि इजरायल को केवल बाहरी सैन्य सहायता पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि ईरान और उसके सहयोगी संगठन—जैसे हिजबुल्लाह और हमास—इजरायल के लिए गंभीर चुनौती बने हुए हैं। नेतन्याहू ने कहा, “हम ईरान और उसके प्रॉक्सी संगठनों का सामना कर रहे हैं। हमने उनके खिलाफ निर्णायक कार्रवाई की है, लेकिन खतरा अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। आने वाले वर्षों में हमारी स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि हम आज कौन से फैसले लेते हैं।”
स्वदेशी हथियार निर्माण पर जोर
इजरायली प्रधानमंत्री ने घरेलू हथियार निर्माण क्षमता को राष्ट्रीय सुरक्षा का अहम हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि इजरायल को अपने रक्षा उत्पादन तंत्र को इतना मजबूत बनाना होगा कि वह लंबे समय तक स्वतंत्र सैन्य शक्ति के रूप में खड़ा रह सके। उन्होंने कहा, “मैं अमेरिका से मिले सहयोग और समर्थन की सराहना करता हूं, लेकिन हमें अपने स्वतंत्र हथियार उत्पादन सिस्टम को और विकसित करना होगा। हमें अपने हथियार खुद बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ना चाहिए।” उनके अनुसार, किसी भी देश की दीर्घकालिक सुरक्षा उसकी सैन्य शक्ति और उसे बनाए रखने की क्षमता पर निर्भर करती है।
रणनीतिक निर्भरता घटाने की तैयारी
नेतन्याहू ने कहा कि इजरायल को टेक्नोलॉजी, आधुनिक हथियार प्रणालियों और सैन्य प्रशिक्षण में बड़े स्तर पर निवेश करना होगा। उनका मानना है कि भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए तकनीकी श्रेष्ठता बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि इजरायल को रणनीतिक निर्भरता से बाहर निकलते हुए अधिक आत्मनिर्भर रक्षा ढांचा तैयार करना चाहिए। बेहतर सैन्य प्रशिक्षण, उन्नत तकनीक और मजबूत घरेलू रक्षा उद्योग ही आने वाले दशकों में इजरायल की स्थिति तय करेंगे।
क्षेत्रीय तनाव के बीच बढ़ी चिंता
विशेषज्ञों का मानना है कि नेतन्याहू के बयान से यह स्पष्ट है कि इजरायल फिलहाल अपनी सुरक्षा नीति में आक्रामक रुख बनाए रखना चाहता है। मध्य पूर्व में लगातार बढ़ते तनाव, ईरान की गतिविधियों और सीमावर्ती संघर्षों के बीच यह बयान क्षेत्रीय राजनीति पर बड़ा असर डाल सकता है। नेतन्याहू लंबे समय से इजरायल की अमेरिकी सैन्य सहायता पर निर्भरता कम करने की बात करते रहे हैं। उनका मानना है कि इजरायल को एक ऐसी स्वतंत्र सैन्य शक्ति बनना चाहिए, जो किसी भी बाहरी सहायता के बिना अपनी सुरक्षा सुनिश्चित कर सके। वर्तमान हालात को देखते हुए आने वाले दिनों में इजरायल, ईरान और अमेरिका के बीच कूटनीतिक और सैन्य समीकरणों में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
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