रुपये को मजबूती देने के लिए RBI का बड़ा दांव, विदेशी निवेशकों को सरकारी बॉन्ड पर टैक्स से मिली राहत

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मिडिल ईस्ट तनाव के बीच RBI ने विदेशी निवेशकों को सरकारी बॉन्ड पर कैपिटल गेन टैक्स से राहत दी है। फैसले के बाद डॉलर के मुकाबले रुपया 50 पैसे तक मजबूत हुआ।

RBI Announces Tax Relief for Foreign Investors: वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और मिडिल ईस्ट में जारी अस्थिरता के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने रुपये को मजबूती देने और विदेशी पूंजी आकर्षित करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। शुक्रवार को मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक के बाद RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं, जिनका असर तुरंत भारतीय मुद्रा बाजार में देखने को मिला। RBI ने घोषणा की है कि 1 अप्रैल से विदेशी निवेशकों को भारतीय सरकारी बॉन्ड से होने वाले कैपिटल गेन पर किसी प्रकार का टैक्स नहीं देना होगा। इस फैसले का उद्देश्य विदेशी निवेशकों को भारतीय बॉन्ड बाजार में अधिक निवेश के लिए प्रोत्साहित करना है।

रुपये में आई मजबूती

केंद्रीय बैंक की घोषणा के बाद विदेशी मुद्रा बाजार में सकारात्मक माहौल देखने को मिला। डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया एक ही कारोबारी सत्र में करीब 50 पैसे मजबूत होकर 95.24 के स्तर तक पहुंच गया। इंटरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया 95.72 प्रति डॉलर पर खुला था और बाद में दिन के कारोबार के दौरान मजबूत होकर रिकॉर्ड इंट्रा-डे स्तर तक पहुंच गया। विशेषज्ञों का मानना है कि RBI के इस कदम से विदेशी निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा और भारतीय वित्तीय बाजार में डॉलर का प्रवाह तेज हो सकता है।

क्यों बढ़ा था रुपये पर दबाव?

पिछले कुछ महीनों से मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष और अनिश्चितता का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ा है। कच्चे तेल की कीमतें लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 125 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गईं। भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए महंगे क्रूड ऑयल का सीधा दबाव रुपये पर पड़ा। इसके अलावा वैश्विक जोखिम बढ़ने के कारण कई विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से पूंजी निकालनी शुरू कर दी थी, जिससे डॉलर की मांग बढ़ी और रुपया कमजोर होता गया।

विदेशी निवेशकों के लिए आसान हुए नियम

RBI ने केवल टैक्स राहत ही नहीं दी, बल्कि विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) और अन्य अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के लिए निवेश संबंधी कई प्रक्रियाओं को भी सरल बनाया है। बॉन्ड और इक्विटी बाजार में निवेश के नियमों में ढील देकर निवेशकों के प्रवेश और निकासी को अधिक आसान बनाया गया है। केंद्रीय बैंक का मानना है कि ऐसे समय में जब वैश्विक वित्तीय बाजार अनिश्चितता से गुजर रहे हैं, भारत को निवेश के लिए अधिक आकर्षक बनाना आवश्यक है। इससे विदेशी पूंजी का प्रवाह बढ़ेगा और घरेलू बाजार को स्थिरता मिलेगी।

भारतीय अर्थव्यवस्था को मिल सकता है फायदा

आर्थिक जानकारों के अनुसार, सरकारी बॉन्ड पर टैक्स छूट का फैसला भारत के ऋण बाजार को अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के लिए अधिक प्रतिस्पर्धी बनाएगा। इससे विदेशी निवेश बढ़ने की संभावना है, जो न केवल रुपये को समर्थन देगा बल्कि देश के विदेशी मुद्रा भंडार को भी मजबूत कर सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि वैश्विक हालात ज्यादा नहीं बिगड़ते हैं और विदेशी निवेश का प्रवाह बढ़ता है, तो आने वाले समय में रुपये पर दबाव कम हो सकता है और भारतीय वित्तीय बाजार को भी स्थिरता मिलने की उम्मीद है।

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