Sadhguru Completes Kailash Yatra on Motorcycle: सद्गुरु जग्गी वासुदेव ने लगातार दो आपातकालीन ब्रेन सर्जरी के मात्र डेढ़ साल बाद मोटरसाइकिल से कैलाश यात्रा पूरी की। 18,000 फीट ऊँचाई पर हुई इस यात्रा ने योग की शक्ति और आंतरिक साधना की अद्भुत क्षमता को दुनिया के सामने प्रस्तुत किया।
कोयंबटूर: मात्र डेढ़ साल पहले लगातार दो आपातकालीन ब्रेन सर्जरी से गुज़रने के बाद सद्गुरु जग्गी वासुदेव ने मोटरसाइकिल से कठिन कैलाश यात्रा सफलतापूर्वक पूरी कर एक असाधारण उदाहरण प्रस्तुत किया है। यह उपलब्धि न केवल शारीरिक क्षमता का प्रतीक है, बल्कि योगिक विज्ञान की अद्भुत शक्ति और स्वास्थ्य पुनर्स्थापन क्षमता का जीवंत प्रमाण भी है। जब सद्गुरु कैलाश यात्रा पूरी करने के बाद कोयंबटूर लौटे तो यहां स्थित ईशा योग केंद्र में उनका भव्य स्वागत हुआ। कोयंबटूर हवाईअड्डे पर हजारों की भीड़ उमड़ पड़ी। ग्रामीण, स्थानीय नागरिक और स्वयंसेवक बड़ी संख्या में मार्ग के दोनों ओर खड़े रहे और पूरा रास्ता श्रद्धा और भक्ति के रंग में डूब गया।

भारतीय संस्कृति में कैलाश यात्रा को सर्वाधिक पवित्र यात्राओं में गिना जाता है। इसी परंपरा को निभाते हुए लोगों ने सद्गुरु को विशेष श्रद्धा के साथ स्वागत किया। इससे पूर्व अभिनेता डिनो मोरिया के साथ एक ऑनलाइन बातचीत में सद्गुरु ने स्पष्ट किया था, “मैं कैलाश शिव को देखने नहीं जा रहा हूँ। मेरे लिए शिव का जो आयाम है, वह मेरी आँखें बंद करते ही मेरे भीतर है। कैलाश एक अद्भुत पुस्तकालय है, परंतु आजकल मैं वहाँ उसके लिए नहीं जाता। मैं कुछ सौ लोगों को अपने साथ ले जा रहा हूँ, ताकि वे सांसारिक चिंताओं से ऊपर उठकर गहनता से जीवन को देख सकें।”
कोयंबटूर हवाईअड्डे पर पत्रकारों से बात करते हुए सद्गुरु ने कहा, “डॉक्टरों की सलाह थी कि मुझे मोटरसाइकिल नहीं चलानी चाहिए। इसके बावजूद मैं समुद्र तल से 18,000 फीट की ऊँचाई तक गया। यह योग की शक्ति का प्रमाण है।” उन्होंने आगे बताया कि दो सर्जरी और बढ़ती उम्र के बावजूद उन्होंने इस यात्रा को सहजता से पूरा किया। “योग का अर्थ है सृष्टि के मूल स्रोत से एक हो जाना। जब आप उस स्रोत से जुड़े होते हैं, तो यह कोई चुनौती नहीं रह जाती। इस अवस्था में सब कुछ सहज और प्रयासहीन हो जाता है।”

यात्रा के दौरान सद्गुरु ने अमेरिका द्वारा भारत पर लगाए गए टैरिफ के विषय पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “जब चुनौतियाँ सामने आती हैं तो हमें और अधिक दृढ़ और सक्षम होना चाहिए। भारत अपनी संप्रभुता और स्वतंत्र व्यापार के अधिकार से पीछे नहीं हट सकता। परिस्थितियाँ अनुकूल हों या प्रतिकूल, हमें हर हाल में उन्नति करनी होगी—यही हमारी असली क्षमता है।”
सद्गुरु की यह मोटरसाइकिल यात्रा 9 अगस्त को गोरखपुर (उत्तर प्रदेश) से शुरू हुई। वहाँ से वे नेपाल के काठमांडू, भक्तपुर और थुलीखेल होते हुए नेपाल-तिब्बत सीमा तक पहुँचे। इसके बाद तिब्बत के झांगमु, न्यालम और सागा मार्ग से होते हुए मानसरोवर पहुँचे, जहाँ से उन्होंने पैदल यात्रा कर कैलाश पर्वत का दर्शन किया। इस दौरान उन्हें लगातार बारिश, भूस्खलन, दुर्गम पहाड़ी रास्ते और 15,000 से 20,000 फीट ऊँचाई जैसी कठिन चुनौतियों का सामना करना पड़ा।

यात्रा मार्ग में स्थानीय लोगों ने उन्हें केवल यात्री के रूप में नहीं, बल्कि एक पूजनीय गुरु के रूप में देखा और उत्साहपूर्वक स्वागत किया। इस दौरान सद्गुरु ने अभिनेता आर. माधवन, क्रिकेटर वरुण चक्रवर्ती और निर्देशक नाग अश्विन जैसे चर्चित व्यक्तित्वों से भी ऑनलाइन संवाद किया, जिसमें योग विज्ञान और शिव के रहस्यों पर गहन चर्चा हुई। सद्गुरु की यह यात्रा न केवल शारीरिक धैर्य की मिसाल है, बल्कि यह दिखाती है कि योग साधना और आंतरिक जुड़ाव मनुष्य को किसी भी कठिनाई से ऊपर उठने की क्षमता प्रदान करता है।
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