पुणे के चर्चित केतन अग्रवाल मर्डर केस में पुलिस जांच तेज हो गई है। आरोपी सिया गोयल को लोहागढ़ किले ले जाकर घटनास्थल का पुनर्निर्माण कराया गया। जांच में हत्या की साजिश, रिहर्सल और ऑनलाइन सर्च जैसे कई बड़े खुलासे सामने आए हैं।
Pune Ketan Murder Case: पुणे के चर्चित केतन अग्रवाल हत्याकांड में पुलिस जांच लगातार नए खुलासे कर रही है। मामले में रविवार को जांच ने महत्वपूर्ण मोड़ लिया, जब पुलिस मुख्य आरोपी सिया गोयल को घटनास्थल पुनर्निर्माण (Crime Scene Reconstruction) के लिए लोहागढ़ किले ले गई। अधिकारियों के मुताबिक, इस प्रक्रिया का उद्देश्य 18 जून को हुई घटना के पूरे घटनाक्रम को विस्तार से समझना और आरोपियों के बयानों का सत्यापन करना है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, सिया गोयल (20) और उसके कथित प्रेमी चेतन चौधरी (22) पर आरोप है कि दोनों ने मिलकर पुणे के रियल एस्टेट कारोबारी और सिया के मंगेतर केतन अग्रवाल की हत्या की साजिश रची और उसे लोहागढ़ किले से धक्का देकर मौत के घाट उतार दिया।
घटनास्थल पर पहुंची पुलिस टीम
पुणे ग्रामीण पुलिस की टीम सिया को उस विशेष स्थान पर लेकर पहुंची, जहां कथित तौर पर केतन अग्रवाल को धक्का दिया गया था। अधिकारियों ने मौके पर घटनाओं की क्रमवार पड़ताल की और यह समझने की कोशिश की कि हत्या किस तरह अंजाम दी गई। पुलिस का कहना है कि चेतन चौधरी को भी अलग से घटनास्थल पर ले जाकर घटनाक्रम का पुनर्निर्माण कराया जाएगा। इससे जांच एजेंसियों को दोनों आरोपियों के बयान मिलाने और घटना के दौरान उनकी भूमिका स्पष्ट करने में मदद मिलेगी।
शादी से बचने के लिए रची गई साजिश?
प्रारंभिक पूछताछ में सिया गोयल ने कथित तौर पर स्वीकार किया है कि वह केतन अग्रवाल से शादी नहीं करना चाहती थी। लेकिन परिवार और सामाजिक दबाव के चलते वह शादी तोड़ने का साहस नहीं जुटा पा रही थी। जांचकर्ताओं के अनुसार, सिया को डर था कि शादी रद्द करने से परिवार की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचेगा। इसी वजह से उसने अपने प्रेमी चेतन चौधरी के साथ मिलकर केतन को रास्ते से हटाने की साजिश बनाई।
पुलिस इस एंगल से भी जांच कर रही है कि हत्या पूरी तरह भावनात्मक दबाव का परिणाम थी या इसके पीछे कोई अन्य आर्थिक अथवा व्यक्तिगत कारण भी जुड़े थे।
हत्या से पहले की गई थी पूरी तैयारी
जांच में सामने आया है कि यह हत्या अचानक नहीं हुई, बल्कि काफी सोच-समझकर योजना बनाकर अंजाम दी गई। पुलिस सूत्रों के अनुसार, दोनों आरोपियों ने हत्या से पहले कई दिनों तक इसकी तैयारी की थी। सिया और चेतन ने कथित तौर पर इंटरनेट पर हत्या के तरीके खोजे। इतना ही नहीं, दोनों ने संभावित पुलिस पूछताछ के सवालों के जवाब भी पहले से तैयार कर रखे थे ताकि जांच को भ्रमित किया जा सके। डिजिटल फॉरेंसिक जांच में आरोपियों के मोबाइल फोन, चैट हिस्ट्री, इंटरनेट सर्च रिकॉर्ड और कॉल डिटेल्स की गहन जांच की जा रही है।
पहले भी हो चुका था हत्या का प्रयास
जांच एजेंसियों को यह भी पता चला है कि केतन अग्रवाल की हत्या का पहला प्रयास 14 जून को किया गया था। हालांकि उस समय योजना सफल नहीं हो सकी। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, इसके बाद दोनों आरोपियों ने रणनीति में बदलाव किया और अधिक सुनियोजित तरीके से हत्या की नई योजना तैयार की।
किले में की गई थी रिहर्सल
सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह है कि हत्या से पहले आरोपियों ने कथित तौर पर लोहागढ़ किले में जाकर पूरी योजना का पूर्वाभ्यास भी किया था। जांच में सामने आया कि घटना से चार से पांच दिन पहले दोनों एक अन्य स्थान पर मिले और केतन को किले से धक्का देने की संभावित स्थिति का अभ्यास किया। उन्होंने किले के अलग-अलग हिस्सों का निरीक्षण किया और सबसे उपयुक्त स्थान चुना। पुलिस का मानना है कि यह पूरा मामला पूर्व नियोजित हत्या का मजबूत संकेत देता है।
जांच के केंद्र में कई अहम सवाल
फिलहाल जांच एजेंसियां कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर काम कर रही हैं, जैसे कि हत्या की योजना कब और कैसे बनाई गई? क्या इसमें किसी तीसरे व्यक्ति की भूमिका थी? डिजिटल साक्ष्य क्या कहानी बयान कर रहे हैं? हत्या का वास्तविक मकसद क्या था? पुलिस का कहना है कि डिजिटल और फॉरेंसिक साक्ष्य इस केस में निर्णायक भूमिका निभाएंगे। आने वाले दिनों में जांच में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं। केतन अग्रवाल हत्याकांड ने पूरे पुणे और आसपास के इलाकों में सनसनी फैला दी है। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, यह मामला और भी पेचीदा होता जा रहा है।
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