पेट्रोल-डीजल और LPG कीमतों पर कांग्रेस का केंद्र पर हमला, खरगे बोले- जनता भाजपा के लिए सिर्फ टैक्स वसूली का जरिया

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कांग्रेस अध्यक्ष Mallikarjun Kharge ने पेट्रोल, डीजल और LPG की बढ़ती कीमतों को लेकर केंद्र सरकार पर हमला बोला। खरगे ने कहा कि कच्चे तेल की कीमतें घटने के बावजूद जनता को राहत नहीं मिल रही।

Congress Attacks Centre Over Fuel Prices: पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की लगातार ऊंची कीमतों को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष Mallikarjun Kharge ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) आम जनता को केवल टैक्स और वसूली का साधन मान रही है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट के बावजूद राहत देने से बच रही है। शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए खरगे ने तेल की कीमतों को लेकर केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब पश्चिम एशिया में युद्ध की स्थिति बनी हुई थी और कच्चे तेल की कीमतें 138 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं, तब देश में पेट्रोल लगभग 94.77 रुपये प्रति लीटर और डीजल 87.67 रुपये प्रति लीटर के आसपास बिक रहा था।

कांग्रेस अध्यक्ष ने दावा किया कि वर्तमान में कच्चे तेल की कीमत घटकर लगभग 70.71 डॉलर प्रति बैरल रह गई है, लेकिन इसके बावजूद देश के कई हिस्सों में पेट्रोल 102.12 रुपये प्रति लीटर और डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर की दर से बेचा जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब कच्चे तेल की कीमतों में इतनी बड़ी गिरावट आई है तो सरकार पेट्रोल और डीजल के दाम कम क्यों नहीं कर रही। खरगे ने रसोई गैस की बढ़ती कीमतों का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में तनाव और युद्ध का हवाला देकर भाजपा सरकार ने वाणिज्यिक एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में भारी बढ़ोतरी की थी। अब जबकि वैश्विक आपूर्ति सामान्य हो चुकी है, तब भी गैस सिलेंडर की कीमतों में अपेक्षित कमी नहीं की जा रही है।

उन्होंने आरोप लगाया कि घरेलू रसोई गैस सिलेंडर, पांच किलोग्राम वाले छोटे सिलेंडर, जिनका इस्तेमाल बड़ी संख्या में प्रवासी श्रमिक और निम्न आय वर्ग के लोग करते हैं, साथ ही सीएनजी की कीमतों में भी बढ़ोतरी की गई है। इससे आम लोगों के घरेलू बजट पर सीधा असर पड़ा है। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि महंगाई की मार पहले से झेल रही जनता को ईंधन और गैस की ऊंची कीमतों के कारण अतिरिक्त आर्थिक बोझ उठाना पड़ रहा है। उनके मुताबिक, जब कच्चा तेल महंगा था तब भी जनता ने बोझ सहा और अब जब कच्चा तेल सस्ता हो चुका है, तब भी राहत नहीं दी जा रही।

खरगे ने केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें कम हो चुकी हैं, तो इसका लाभ आम नागरिकों तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार टैक्स के जरिए राजस्व बढ़ाने में अधिक रुचि दिखा रही है, जबकि आम आदमी राहत की उम्मीद में इंतजार कर रहा है। ईंधन की कीमतों को लेकर केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच यह बहस लंबे समय से जारी है। पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कीमतें देश की महंगाई दर और आम नागरिकों के दैनिक खर्च पर सीधा असर डालती हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में यह मुद्दा राजनीतिक और आर्थिक बहस का केंद्र बना रह सकता है।

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