CBSE की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) व्यवस्था को लेकर उठे विवाद के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। CBSE चेयरमैन राहुल सिंह और सचिव हिमांशु गुप्ता का ट्रांसफर कर जांच समिति गठित की गई है। संसद की स्थायी समिति ने भी मूल्यांकन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए।
CBSE OSM Controversy: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) में ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली को लेकर उठे विवाद के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। जानकारी के अनुसार, CBSE के चेयरमैन राहुल सिंह और बोर्ड के सचिव हिमांशु गुप्ता का तबादला कर दिया गया है। इसके साथ ही OSM सेवाओं की खरीद और उसके क्रियान्वयन से जुड़े मामलों की जांच के लिए एक विशेष जांच समिति का गठन किया गया है।
सूत्रों के मुताबिक, यह कार्रवाई उस समय सामने आई जब शिक्षा मंत्रालय से संबंधित संसद की स्थायी समिति की बैठक में CBSE अधिकारियों से इस पूरे मामले पर विस्तृत जवाब-तलब किया गया। बैठक में नई मूल्यांकन प्रणाली को लागू करने की प्रक्रिया, तैयारी और पारदर्शिता को लेकर कई गंभीर प्रश्न उठाए गए।
संसदीय समिति ने जताई नाराजगी
सूत्रों के अनुसार, समिति के अध्यक्ष दिग्विजय सिंह ने CBSE अधिकारियों से पूछा कि ऑन-स्क्रीन मार्किंग जैसी महत्वपूर्ण व्यवस्था को लागू करने में इतनी जल्दबाजी क्यों दिखाई गई। उन्होंने सवाल किया कि क्या इस व्यवस्था को बेहतर तैयारी और प्रशिक्षण के साथ अगले शैक्षणिक सत्र तक टाला नहीं जा सकता था। बैठक के दौरान यह भी कहा गया कि परीक्षा मूल्यांकन जैसी संवेदनशील प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की जल्दबाजी सीधे छात्रों के भविष्य को प्रभावित कर सकती है। समिति ने CBSE से इस संबंध में विस्तृत लिखित जवाब भी मांगा है।
छात्र ने उजागर कीं कई कमियां
बैठक की एक विशेष बात यह रही कि इसमें एक छात्र को भी आमंत्रित किया गया था। छात्र ने मूल्यांकन प्रक्रिया से जुड़ी कई व्यावहारिक समस्याओं और तकनीकी कमियों की ओर समिति का ध्यान आकर्षित किया। सूत्रों के अनुसार, छात्र द्वारा उठाए गए मुद्दों ने समिति के सदस्यों को प्रभावित किया। इसी दौरान भाजपा सांसद भीम सिंह ने टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि अधिकारियों को व्यवस्था संभालने में कठिनाई हो रही है तो इस छात्र को ही उनका सहायक बना लेना चाहिए, जिससे कई समस्याओं का समाधान हो सकता है।
ठेका प्रक्रिया पर भी उठे सवाल
समाजवादी पार्टी के सांसद जियाउर रहमान बर्क ने बैठक में OSM प्रणाली के लिए चुनी गई कंपनी और ठेका प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि ऐसी कंपनी को जिम्मेदारी क्यों सौंपी गई, जिसके पास पर्याप्त अनुभव और तैयारी नहीं थी। उन्होंने यह भी जानना चाहा कि शिक्षकों को नई प्रणाली के लिए समय रहते पर्याप्त प्रशिक्षण क्यों नहीं दिया गया और पूरे प्रोजेक्ट को जल्दबाजी में लागू करने की आवश्यकता क्या थी।
बर्क ने कहा कि यदि इस प्रक्रिया में लापरवाही हुई है तो इसकी जिम्मेदारी केवल संबंधित कंपनी की नहीं, बल्कि उन अधिकारियों की भी है जिन्होंने इस व्यवस्था को मंजूरी दी। उन्होंने मामले में जवाबदेही तय करने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
जांच समिति करेगी पूरे मामले की समीक्षा
सरकारी सूत्रों के अनुसार, गठित जांच समिति ऑन-स्क्रीन मार्किंग सेवाओं की खरीद, तकनीकी चयन, कार्यान्वयन प्रक्रिया, प्रशिक्षण व्यवस्था और ठेका आवंटन से जुड़े सभी पहलुओं की समीक्षा करेगी। समिति अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
छात्रों और अभिभावकों की नजरें रिपोर्ट पर
इस पूरे घटनाक्रम के बाद छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों की नजरें अब जांच समिति की रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं। माना जा रहा है कि रिपोर्ट आने के बाद CBSE की मूल्यांकन प्रणाली और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
फिलहाल, केंद्र सरकार की इस कार्रवाई को शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
![]()
