होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने की आशंका के बीच भारत तैयार, 10–15 दिन का भंडार, रूस और लैटिन अमेरिका से आयात बढ़ाने की योजना

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Strait of Hormuz Crisis: होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के बीच भारत के पास 10–15 दिन का कच्चे तेल का भंडार मौजूद है। सरकार रूस, वेनेजुएला, ब्राजील और अफ्रीकी देशों से आयात बढ़ाने की तैयारी में है।

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य के अस्थायी रूप से बंद होने की खबरों के बीच भारत ने कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर सतर्क रुख अपनाया है। सरकारी अधिकारियों के अनुसार, देश के पास फिलहाल इतना कच्चा तेल भंडार उपलब्ध है कि वह कम से कम 10 से 15 दिनों की जरूरतों को पूरा कर सकता है। साथ ही, पेट्रोल और डीजल जैसे तैयार ईंधन का भी 7 से 10 दिनों का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है।

अल्पकालिक असर सीमित, दीर्घकालिक स्थिति पर नजर

ऊर्जा क्षेत्र के अधिकारियों का कहना है कि यदि जलडमरूमध्य कुछ समय के लिए बाधित भी रहता है, तो निकट भविष्य में आपूर्ति पर बड़ा असर पड़ने की संभावना नहीं है। भारत ने पिछले कुछ वर्षों में अपने आयात स्रोतों में विविधता लाई है, जिससे किसी एक मार्ग या देश पर निर्भरता कम हुई है। हालांकि, विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर संकट लंबा खिंचता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। इस सप्ताह ब्रेंट क्रूड करीब 73 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बंद हुआ। आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में कीमतें 80 डॉलर प्रति बैरल या उससे अधिक तक जा सकती हैं।

रूस से आयात बढ़ाने का विकल्प

अधिकारियों के मुताबिक, यदि पश्चिम एशिया से आपूर्ति प्रभावित होती है तो भारत रूस से कच्चे तेल का आयात बढ़ा सकता है। पिछले दो वर्षों में रियायती दरों पर रूसी तेल खरीद ने भारत को मूल्य स्थिरता बनाए रखने में मदद की है। जरूरत पड़ने पर दीर्घकालिक अनुबंधों और स्पॉट खरीद दोनों विकल्पों का इस्तेमाल किया जा सकता है।

लैटिन अमेरिका और अफ्रीका पर भी नजर

ऊर्जा मंत्रालय से जुड़े सूत्रों का कहना है कि भारत वेनेजुएला, ब्राजील और अफ्रीकी देशों से भी अतिरिक्त कच्चे तेल की खरीद पर विचार कर सकता है। इन देशों से आपूर्ति का समय अधिक लग सकता है, लेकिन आपूर्ति श्रृंखला को संतुलित रखने के लिए यह एक व्यवहार्य विकल्प है।

रणनीतिक भंडार की भूमिका

भारत ने आपात स्थितियों से निपटने के लिए रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (Strategic Petroleum Reserve) विकसित किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक आपूर्ति में गंभीर व्यवधान आता है, तो इन भंडारों का उपयोग कर घरेलू बाजार में कीमतों और उपलब्धता को संतुलित रखा जा सकता है।

सरकार की आकस्मिक योजनाएं तैयार

शीर्ष अधिकारियों और विश्लेषकों का कहना है कि सरकार ने विभिन्न परिदृश्यों के लिए आकस्मिक योजनाएं तैयार कर रखी हैं। इनमें वैकल्पिक शिपिंग मार्गों का उपयोग, आयात स्रोतों में विविधता, और घरेलू रिफाइनरियों के साथ समन्वय बढ़ाना शामिल है। फिलहाल, सरकार की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि देश में ईंधन की उपलब्धता बनी रहे और आम उपभोक्ताओं पर किसी प्रकार का तत्काल दबाव न पड़े। स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम के अनुसार रणनीति में आवश्यक बदलाव किए जाएंगे।

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