West Bengal Draft Voter List 2025: पश्चिम बंगाल की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में 58 लाख नाम हटाए गए हैं। हिंदी भाषी और शहरी सीटों पर 15%–36% तक कटौती, जबकि मुस्लिम बहुल इलाकों में नाम हटाने की दर बेहद कम रही।
कोलकाता: पश्चिम बंगाल में मंगलवार को जारी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट ने राज्य की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के मुताबिक राज्य में कुल मतदाताओं की संख्या 7.66 करोड़ से घटकर 7.08 करोड़ रह गई है। यानी लगभग 58 लाख मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं। इन नामों को हटाने के पीछे मौत, स्थायी पलायन, नामों का दोहराव और एन्यूमरेशन फॉर्म जमा न होना जैसे कारण बताए गए हैं।
ड्राफ्ट रोल के विस्तृत विश्लेषण से यह साफ हुआ है कि जिन विधानसभा सीटों पर हिंदी भाषी मतदाताओं की संख्या अधिक है, वे उन टॉप 10 सीटों में शामिल हैं जहां सबसे ज्यादा नाम हटाए गए। इन क्षेत्रों में 15% से लेकर 36% तक वोटरों के नाम सूची से कटे हैं। इसके विपरीत, मुस्लिम बहुल सीटों पर नाम हटाने की दर काफी कम देखी गई है।
कोलकाता और आसपास के इलाकों में भारी कटौती
कोलकाता और उसके आसपास के शहरी निर्वाचन क्षेत्रों में वोटर लिस्ट से नाम हटाने की संख्या सबसे ज्यादा रही है। कोलकाता उत्तर और कोलकाता दक्षिण जिलों में यह कटौती सबसे अधिक दर्ज की गई।
सबसे ज्यादा प्रभावित 10 सीटों में शामिल हैं:
- जोरासांको – 36.66%
- चौरंगी – 35.45%
- कोलकाता पोर्ट – 26.09%
- भवानीपुर – 21.55% (मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का निर्वाचन क्षेत्र)
इन इलाकों में हिंदी भाषी आबादी अच्छी-खासी संख्या में रहती है। हालांकि तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने 2021 के विधानसभा चुनावों में इन सभी सीटों पर जीत दर्ज की थी और 2024 के लोकसभा चुनावों में भी बढ़त बनाई, लेकिन भारतीय जनता पार्टी (BJP) यहां अपना राजनीतिक आधार मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
जहां BJP मजबूत, वहां भी नाम कटने की दर ज्यादा
ड्राफ्ट लिस्ट से यह भी सामने आया है कि जिन सीटों पर BJP एक मजबूत राजनीतिक ताकत मानी जाती है, वहां भी वोटर लिस्ट से नाम हटाने की दर अपेक्षाकृत अधिक है।
प्रमुख सीटों में शामिल हैं:
- हावड़ा उत्तर – 26.89%
- आसनसोल दक्षिण – 13.68%
- आसनसोल उत्तर – 14.71%
- बैरकपुर – 19.01%
इनमें से केवल आसनसोल दक्षिण में BJP का विधायक है, जबकि बाकी सीटों पर पार्टी TMC से मामूली अंतर से पीछे रही है और वहां उसका संगठनात्मक ढांचा मजबूत माना जाता है।
मतुआ समुदाय वाले इलाकों में भी असर
चुनावी रूप से प्रभावशाली मतुआ समुदाय के प्रभुत्व वाले इलाकों में भी पहले चरण में बड़ी संख्या में नाम हटाए गए हैं।
इन सीटों में शामिल हैं:
- कस्बा – 17.95%
- सोनारपुर दक्षिण – 11.29%
- बनगांव उत्तर – 9.71%
मुस्लिम बहुल सीटों पर कटौती न के बराबर
इसके उलट, मुस्लिम बहुल विधानसभा सीटों पर नाम हटाने की दर बहुत कम रही है।
2011 की जनगणना के अनुसार,
- मुर्शिदाबाद (66.3% मुस्लिम आबादी) में केवल 4.84% नाम हटाए गए
- मालदा (51.6% मुस्लिम आबादी) में यह आंकड़ा 6.31% रहा
इन जिलों की किसी भी विधानसभा सीट पर नाम हटाने की दर 10% से अधिक नहीं है।
मुर्शिदाबाद की डोमकल (3.4%), रेजिनगर (5.04%) और शमशेरगंज (6.86%) जैसी सीटों पर कटौती बेहद सीमित रही, वहीं मालदा की मुस्लिम बहुल मानिकचौक सीट पर यह आंकड़ा 6.08% रहा। उत्तर दिनाजपुर जिले की चोपड़ा (7.44%), गोलपोखर (7.03%), इस्लामपुर (8.17%) और चकुलिया (8.55%) तथा बीरभूम जिले की हसन (4.95%) और नानूर (5.24%) जैसी अल्पसंख्यक बहुल सीटों पर भी यही रुझान देखने को मिला।
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज
ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी होने के बाद सियासी बयानबाज़ी भी तेज हो गई है।
TMC प्रवक्ता अरूप चक्रवर्ती ने कहा, “BJP का पूरा नैरेटिव झूठ पर आधारित है। केंद्र सरकार ने जनगणना से पहले ही SIR शुरू कर दिया। अगर जनगणना होती तो असली सच्चाई सामने आ जाती। ड्राफ्ट लिस्ट से साफ है कि बंगाल में उत्तर प्रदेश और बिहार के लोग रह रहे हैं, बांग्लादेश से कोई घुसपैठिया नहीं।” वहीं वरिष्ठ BJP नेता राहुल सिन्हा ने आरोप लगाया कि “TMC के दबाव के कारण बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) निष्पक्ष और स्वतंत्र रूप से काम नहीं कर पाए, जिसका असर वोटर लिस्ट पर पड़ा।” ड्राफ्ट वोटर लिस्ट पर आपत्तियां दर्ज करने की प्रक्रिया अभी जारी है, लेकिन आंकड़ों ने साफ कर दिया है कि यह मुद्दा आने वाले दिनों में पश्चिम बंगाल की राजनीति के केंद्र में रहने वाला है।
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